नई दिल्ली, जनवरी 1 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि बलात्कार के आरोपों में किसी व्यक्ति को झूठे फंसाने से आरोपी पर जिंदगी भर के लिए निशान रह जाते हैं। अदालत ने कहा कि बलात्कार के आरोपों के दूरगामी असर न केवल कथित पीड़ित बल्कि आरोपी और उसके परिवार को भी भुगतने पड़ते हैं। सम्मान की हानि, जेल की पीड़ा और सामाजिक बदनामी ऐसे घाव हैं, जो झूठे फंसाए जाने की स्थिति में भी जीवन भर पीछा नहीं छोड़ते। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ दिल्ली पुलिस की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका सत्र अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें पीड़िता के अपने पूर्व बयान से मुकर जाने के बाद सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि बिना किसी बाहरी दबाव के पीड़िता द्वारा अपने बयान को पूरी तर...