पूरन भिलंगवाल। ज्योतिर्मठ, नवम्बर 29 -- हिमालय की कंदराओं में तपस्या की वैदिक काल से चली आ रही परंपरा आज भी जीवित है। शीतकाल के लिए भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद हो चुके हैं, लेकिन आस्था के द्वार खुले हैं। इस बार देश के विभिन्न कोनों और नेपाल के करीब 27 साधु-संतों ने प्रशासन से शीतकाल के दौरान बदरीनाथ धाम में रहकर तपस्या करने की अनुमति मांगी है। हालांकि, पहले और अब में यह बदलाव आया है कि पूर्व में जहां साधु-संत तपस्या के दौरान हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाले कंदमूल और फलों पर निर्भर रहते थे। वहीं, अब साधु-संत, सूखे मेवे, राशन और गर्म कपड़े आदि साथ रखते हैं। मोक्षधाम श्री बदरीनाथ जी के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, कपाट बंद होने के बाद बदरीपुरी क्षेत्र में मानव प्रवेश वर्जित माना गया है। इस संदर्भ में स्कन्दप...