चमोली, नवम्बर 26 -- बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद शीतकाल के लिए बंद हो गए। सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों और जयकारों के बीच 20 हजार से अधिक श्रद्धालु इस क्षण के साक्षी बने। कपाट बंद होने से पहले मंदिर का श्रृंगार, महाभिषेक, भोग और सायंकालीन पूजा संपन्न हुई। दोपहर 02:56 बजे रावल ने गर्भगृह के द्वार बंद किए। इसके साथ ही चारधाम यात्रा का औपचारिक समापन हो गया। बदरीनाथ धाम में कपाट बंदी के वक्त एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें मंदिर के मुख्य पुजारी यानी रावल स्त्री वेश में गर्भगृह में प्रवेश करते हैं और सखी रूप धारण करते हैं।क्या है यह परंपरा हर साल शीतकाल शुरू होते समय यानी जब धाम को करीब 6 महीने के लिए बंद किया जाता है, तब पहले कई पूजा‑विधियां होती हैं। इन पूजा‑पाठों में पांच‑पंच पूजाएं शामिल होती हैं। इन कर्म...