नई दिल्ली, अगस्त 28 -- अनादि बरुआ,पूर्व राष्ट्रीय कोच, फुटबॉल आज 'हॉकी के जादूगर' मेजर ध्यानचंद की जयंती है। मेरा सौभाग्य है कि उनके बेटे अशोक कुमार, जो खुद एक महान खिलाड़ी हैं, मेरे अच्छे मित्रों में एक हैं। आज के दिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। खेल सिर्फ जीत-हार से नहीं, बल्कि फिटनेस, समर्पण और अनुशासन से भी जुड़ा है। संभवत: यही वजह है कि इस साल तीन दिनों के राष्ट्रीय फिटनेस व खेल आंदोलन के रूप में यह दिवस मनाया जा रहा है। देश में खेल संस्कृति पहले काफी कमजोर थी। खेलों के लिए बजटीय आवंटन बहुत कम होते थे। मगर अब खेलों के विकास के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर काफी कुछ किया जा रहा है। वास्तव में, खेलों को लेकर सोच में बड़ा बदलाव वर्ष 2017 में आया, जब भारत ने फीफा अंडर-17 विश्व कप का आयोजन किया। यह पहला मौका था, जब भा...