चम्पावत, दिसम्बर 8 -- चम्पावत। उत्तराखंड के पर्वतीय ग्रामीण अंचलों में जहाँ लगातार हो रहे पलायन के कारण कई गांव लगभग वीरान हो चुके हैं और सामाजिक सहयोग और श्रमदान की परंपराएं भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जा रही हैं, वहीं विकासखंड पाटी की ग्राम पंचायत बांस-बसवाड़ी से एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है। जहां एक तीस वर्षीय जनप्रतिनिधि नैन सिंह ने श्रमदान से मिसाल स्थापित की है। बीते कुछ दिनों से क्षेत्र में तेंदुए की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों और विशेषकर स्कूल जाने वाले बच्चों में भय का माहौल बना हुआ है। तेंदुए की ओर से गांव के दीपक सिंह की चार बकरियों और रेवती देवी की दुधारू गाय को अपना शिकार बनाए जाने के बाद यह भय और गहरा हो गया। इसी बीच ग्राम पंचायत स्थित राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के चारों ओर लंबे समय से फैली लैंटाना (कुर्री) और जंगली ...