नई दिल्ली, जनवरी 30 -- राजस्थान की कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा (23) का जीवन जितना आध्यात्मिक था, उतना ही संघर्षों और संयोगों से भरा हुआ। बुधवार को जोधपुर में उनका असामयिक निधन हो गया। गुरुवार को पोस्टमॉर्टम के दौरान विवाद की स्थिति बनी, वहीं शाम करीब 6:30 बजे उनका पार्थिव शरीर बालोतरा जिले के परेऊ गांव पहुंचा। शुक्रवार को पैतृक गांव परेऊ में ही साध्वी प्रेम बाईसा का अंतिम संस्कार किया जाएगा। लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा का नाम सिर्फ उनकी मौत की वजह से चर्चा में नहीं है, बल्कि उनका पूरा जीवन एक ऐसी कहानी है, जिसमें आस्था, त्याग और संघर्ष के कई अध्याय जुड़े हुए हैं।बचपन में मां को खोया, पिता ने थामा हाथ बालोतरा जिले के परेऊ गांव की रहने वाली प्रेम बाईसा महज पांच साल की थीं, जब उनकी मां अमरू बाईसा का निधन हो गया। पिता वीरमनाथ पेशे से ट्रक ड्राइवर...
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