मुख्य संवाददाता, जनवरी 8 -- सरकारी स्कूलों की बदहाली की शिकायतें आम हैं, लेकिन इच्छाशक्ति और समर्पण हो तो तस्वीर बदली जा सकती है। इसका जीवंत उदाहरण है उच्च प्राथमिक विद्यालय, टांडा। यहां एक समय ताले लटके थे, लेकिन आज यह स्कूल जिले के टॉप 5 विद्यालयों में गिना जाता है। इस बदलाव के पीछे है गणित शिक्षक सुरेश कुमार की मेहनत। सुरेश ने एक बंद पड़े स्कूल को न सिर्फ दोबारा जीवंत किया, बल्कि अपनी लगन से उसे पीएम श्री विद्यालय का दर्जा भी दिलवा दिया। 21 सितंबर 2015 को जब सुरेश की तैनाती हुई थी, उस समय यह स्कूल बंद पड़ा था। जब स्कूल दोबारा खुला तो मात्र 36 छात्रों ने ही प्रवेश लिया। स्कूल की हालत बेहद खराब थी। न चहारदीवारी थी, न ठीक-ठाक गेट। फर्श और दीवारें भी जर्जर थीं। बरामदे और कक्षाओं में गोबर पड़ा रहता था। जर्जर शौचालय उपयोग के लायक नहीं थे। ऐस...
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