मैनपुरी, फरवरी 2 -- कस्बे में बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या और उनकी हिंसक प्रवृत्ति से लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात यह हैं कि अब अधिकांश लोग अपनी छतों पर जाना तक छोड़ चुके हैं। न तो लोग छतों पर कपड़े सुखा पा रहे हैं और न ही अनाज, क्योंकि छतों पर बंदरों का पूर्ण कब्जा हो चुका है। कई घरों की छतों पर 15 से 20 बंदरों की टोलियां आपस में लड़ती-झगड़ती दिखाई देती हैं। हिंसक होते बंदरों के डर से बच्चे ही नहीं, बल्कि युवा और बुजुर्ग भी छत पर जाना या बैठना सुरक्षित नहीं मानते। कभी भी किसी बंदर के अचानक हमला कर घायल कर देने का खतरा बना रहता है। जिन घरों के आंगन खुले हैं, वहां रहने वालों को रोजाना नुकसान उठाना पड़ रहा है। बंदर कपड़े, चप्पल और अन्य घरेलू सामान उठाकर ले जाते हैं। रात के समय सदर बाजार से गुजरना भी लोगों के लिए कि...
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