नई दिल्ली, जनवरी 9 -- नई दिल्ली, प्र.सं.। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि एक बार जब किसी आपराधिक मामले की सुनवाई में अंतिम बहस पूरी हो जाती है। मामला फैसले के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है तो जिस न्यायाधीश ने मुकदमा सुना है, उसे फैसला सुनाना ही होगा, भले ही उसका स्थानान्तरण हो गया हो। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने फैसले में रजिस्ट्रार जनरल के 18 जनवरी 2025 और 26 नवंबर 2025 के आदेशों का हवाला दिया। इन आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि स्थानान्तरित किए गए न्यायिक अधिकारियों को उन मामलों की जानकारी देनी होगी, जिनमें उन्होंने कार्यमुक्त होने से पहले फैसला या आदेश सुरक्षित रखा है। साथ ही यह भी निर्देश है कि ऐसे अधिकारी स्थानान्तरण की तारीख से दो से तीन सप्ताह के भीतर उन मामलों में फैसला स...
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