मुरादाबाद, जनवरी 16 -- सत्र 2015-16 को आधार मानते हुए वर्ष 2018 में तत्कालीन डिप्टी सीएम व शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा द्वारा विधान सभा में फी रेगुलेटरी एक्ट बनाया गया था। इस अधिनियम के तहत उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल हर वर्ष केवल महंगाई दर (सीपीआई) में अधिकतम पांच प्रतिशत जोड़कर ही फीस बढ़ा सकते हैं। इसी नियम के अनुसार पिछले दो-तीन वर्षों में स्कूलों द्वारा अधिकतम लगभग 11 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ाई जा सकती थी। मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स के महासचिव नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि फी रेगुलेटरी एक्ट के अनुसार नए प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की फीस निर्धारित करने का अधिकार स्कूलों को दिया गया है, इसलिए उनकी फीस उसी कक्षा के पुराने विद्यार्थियों से अलग हो सकती है। स्कूलों द्वारा इस कानून का सख्ती से पालन किया जाता है और इसकी जानकारी प्रश...
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