कानपुर, दिसम्बर 24 -- कानपुर देहात में आवारा मवेशियों की समस्या किसानों के लिए जी का जंजाल बन गई है। जहां एक तरफ जिले के बड़े अधिकारी कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अपने घरों में हीटर जलाकर आराम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गरीब किसान अपनी खून-पसीने की मेहनत से उगाई गई फसलों को बचाने के लिए कंकपाती रातों में खेतों पर पहरा देने को मजबूर हैं। जिले के सरकारी आंकड़ों की मानें तो करीब 95 गौशालाओं में 10 हजार से ज्यादा गोवंश रखे गए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी लगभग इतने ही मवेशी सड़कों और खेतों में खुलेआम घूम रहे हैं। किसानों ने बताया कि उन्होंने बहुत मुश्किल से महंगे बीज और खाद का इंतजाम कर फसल तैयार की है, लेकिन अब ये आवारा पशु उनके लिए काल बन गए हैं। रात के अंधेरे में मवेशियों का झुंड जिस खेत में घुसता है, उसे पूरी तरह बर्बाद कर देता है। अपनी जमा...
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