पूर्णिया, जून 7 -- बैसा-अमौर, एक संवाददाता। बैसा व अमौर प्रखंड क्षेत्र में शनिवार को मनाए जाने वाले बकरीद को लेकर तैयारी पूरी हो गई। गुरुवार को रौटा बाजार में लगे आखिरी हाट में अन्य दिनों से अधिक संख्या भीड़ देखी गयी। एक ओर जहां लोग मवेशी की खरीद बिक्री करते दिखे वही किराना दुकानों पर भी सामानों की खरीदारी को लेकर भीड़ लगी रही। जमीयत के उलेमा हिंद बैसा सदर हाजी नाहिद गनी ने कहा कि ईद-उल-अजहा एक अरबी शब्द है। इसका मतलब ईद-ए-कुर्बानी यानी बलिदान की भावना है। इसे कुर्बानी की ईद और सुन्नत-ए-इब्राहीम भी कहते हैं। उन्होंने कहा कि ईद-उल-फितर प्रेम और मिठास घोलती है, वहीं ईद-उल-जुहा अपने फर्ज के लिए कुर्बानी की भावना सिखाती है। इस दिन अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी दी जाती है। बकरीद रमजान के करीब दो महीने बाद मनाई जाती है। इस्लाम में इस दिन का ब...
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