नई दिल्ली, जनवरी 1 -- सर्दियों में फटे होंठ एक आम समस्या बन जाते हैं। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ ठंडी हवा, कम पानी पीने या लिप बाम ना लगाने से जोड़कर देखते हैं। लेकिन न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह और आयुर्वेद के अनुसार, फटे होंठ सिर्फ बाहरी ड्राईनेस नहीं बल्कि शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन का संकेत हो सकते हैं। आयुर्वेद मानता है कि होंठ शरीर का 'मॉइस्चर अलार्म' होते हैं। जब शरीर में अंदरूनी चिकनाई यानी लुब्रिकेशन कम होने लगता है तो उसका असर सबसे पहले होंठों पर दिखता है। खासकर सर्दियों में वात दोष बढ़ने के कारण यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। इसलिए सिर्फ बार-बार लिप बाम लगाना समाधान नहीं है, बल्कि जड़ से कारण समझना और अंदर से शरीर को संतुलित करना जरूरी है।आयुर्वेद क्या कहता है फटे होंठों के बारे में?होंठ और कोलन का कनेक्शन: आयुर्वेद के अनुसार, ह...