सहरसा, मई 19 -- सहरसा। रविवार को गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन हुआ। सत्र में मौजूद युवाओं को संबोधित करते डा.अरुण कुमार जायसवाल ने प्रेम और घृणा के संवंध में कहा प्रेम में न रजस है न तमस है, सिर्फ सत्व है। जीवन की सबसे ज्यादा जरूरत, धन पद और यश नहीं है. प्रेम है। पर प्रेम में मांग नहीं होती प्रेम में मांग होगी तो प्रेम संकुचित हो जाएगा, प्रेम दुर्गन्धित हो जाएगा, प्रेम मर जाएगा। अधिकार से प्यार नहीं मिलता किसी को, प्यार के लिए कर्तव्य करना पड़ता है आदमी को झुकना पड़ता है। पर अहंकार झुकता नहीं है इसलिए अहंकार को प्यार की अनुभूति ही नहीं होती है। आप कर्तव्य करते चले जाइए अधिकार मिलता चला जायेगा। प्यार और अहंकार एक साथ नहीं रह सकते, जहाँ प्यार है वहाँ अहंकार नहीं है और जहाँ अहंकार है वहाँ प्यार नहीं है। मौके पर बड़ीस...
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