मथुरा, जनवरी 16 -- ठा. श्री प्रियाकांत जू भगवान का 10वां पाटोत्सव गुरुवार को विधि-विधान एवं हर्षोल्लास से मनाया गया। भगवान के विग्रह का पंचाभिषेक कर स्वर्ण आभायुक्त पोशाक धारण करायी गयी। देवकीनंदन महाराज ने कहा कि मंदिरों में सनातन परम्परा एवं संस्कृति सुरक्षित है। सनातनी मंदिर केवल धार्मिक पूजा का अधिकार ही नहीं देते बल्कि अपने धर्म को बचाये रखने का स्मरण भी कराते हैं। देवकीनंदन महाराज ने भक्तमाल कथा का श्रवण करवाते हुए कहा कि भक्तों की भावना से ही पाषाण की मूरत में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है। सनातनियों को तिलक अवश्य धारण करना चाहिए, यह हमारा श्रंगार है। संत नेत्रपाल महाराज ने बताया कि प्रियाकांत जू भगवान साक्षात करुणा, प्रेम और भक्तवत्सलता के साकार स्वरूप हैं। इस अवसर पर विश्व शांति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट सचिव विजय शर्मा, मंदिर प...