नई दिल्ली, नवम्बर 15 -- पूर्व जद(एस) सांसद प्रज्वल रेवन्ना की दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ अपील हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट में आई। उनके वकील ने तर्क दिया कि निचली अदालत का फैसला मीडिया की बातों से प्रेरित था और ठोस सबूतों से समर्थित नहीं था। न्यायमूर्ति के.एस. मुदगल और न्यायमूर्ति वेंकटेश नाइक की खंडपीठ ने 13 नवंबर को मामले की सुनवाई की। रेवन्ना के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि दोषसिद्धि के लिए कोई ठोस सबूत नहीं था। उन्होंने गवाहों के बयानों में विरोधाभासों का हवाला दिया और दावा किया कि पूछताछ के दौरान निचली अदालत के जज पीड़िता की भावनात्मक स्थिति से प्रभावित हुए थे। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे कारक आजीवन कारावास की सजा का आधार नहीं बन सकते। हाईकोर्ट 25 नवंबर को अपील पर सुनवाई जारी रखेगा।

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