भागलपुर, फरवरी 22 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता। आज प्रकृति पर पूंजीपतियों का कब्जा हो चुका है। कंक्रीट के जंगल बसाने के नाम पर पहाड़ों और जंगलों को नष्ट किया जा रहा है, जिससे गंगा सहित अन्य नदियों के अस्तित्व पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। इसका सीधा असर नदियों पर आश्रित मछुआरों और किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है। ये गंभीर बातें शनिवार को गंगा मुक्ति आंदोलन की ओर से आयोजित गंगा संवाद में उभरकर सामने आईं। इस महत्वपूर्ण विमर्श में बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश की नदियों पर काम करने वाले कई कार्यकर्ता शामिल हुए। संवाद की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समाजकर्मी रामशरण ने नदियों और आजीविका के संकट पर गहरी चिंता जताई। डॉ. योगेंद्र ने प्रकृति पर पूंजीपतियों के बढ़ते वर्चस्व पर सवाल उठाए। वहीं, झारखंड के पर्यावरणविद घनश्याम ने कहा कि श्रम और प्रकृति के स...
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