दरभंगा, जून 9 -- आधुनिक दौर में रजक समाज की आर्थिक बदहाली बढ़ गई है। रजक समाज के लोगों का कहना है कि एक ओर जहां पोखरों का वजूद खत्म होने से धोबी घाट गायब हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ नामी-गिरामी, ड्राई क्लीनर प्रतिष्ठान खुलने, घरों में वाशिंग मशीन के उपयोग आदि से ग्राहकों की तादाद घट गई है। इसके चलते कपड़े साफ व प्रेस (इस्त्री) करने वाले पारंपरिक रोजगार का मुनाफा खत्म हो गया है। इस कार्य से जुड़े रजक परिवार आर्थिक तंगी में जीवन यापन कर रहे हैं। लोग बताते हैं कि पूंजी नहीं रहने के कारण दूसरा रोजगार करना भी मुश्किल है। समाज के बेरोजगार युवक मजबूरी में काम की तलाश के लिए पलायन कर रहे हैं। रजक समाज के लोग परंपरागत पेशे को सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिलने से निराश हैं। बताते हैं कि पीएम मुद्रा लोन या अन्य बैंक लोन भी नहीं मिलता है। बैंक अधिकारी ऋण देने ...
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