नई दिल्ली, सितम्बर 22 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पेरिस जलवायु समझौते के दस साल के बाद भी कई देशों की सरकारें पुराने ढर्रे पर चल रही हैं तथा जीवाश्म ईधन को बढ़ावा देने वाली योजनाएं बना रही हैं। चिंता व्यक्त की गई है कि इससे सदी के आखिर तक तापमान बढ़ोत्तरी को डेढ़ डिग्री पर थामना मुश्किल हो जाएगा और यह बढ़ोत्तरी दो डिग्री से भी ज्यादा की हो सकती है। स्टॉकहोम एनवायरमेंट इंस्टीट्यूट (एसईआई) और यूएनईपी की एक ताजा रिपोर्ट प्रोडक्शन गैप में यह दावा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन से पहले यह रिपोर्ट आंखे खोलने वाली है। यह एक ऐसी रिपोर्ट है जो सरकारों के कोयला, तेल और गैस के नियोजित उत्पादन और पेरिस समझौते के तापमान लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक वैश्विक उत्पादन स्तर के बीच के अंतर को मापती है। यह रिपोर्ट इन अंतरालों की पहच...
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