पूर्णिया, नवम्बर 24 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के बच्चा विभाग के नोडल पदाधिकारी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रेम प्रकाश बताते हैं कि पेयजल सेवन में शुद्धता का ध्यान रखते हुए नवजात बच्चों के स्तनपान यानी दूध पिलाने की प्रक्रिया को कम से कम दो वर्ष तक जारी रखना चाहिए। उन्होंने राज्य के कई जिले में शोध में मां के दूध में यूरेनियम पाए जाने पर यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि चापाकल हो या फिर नल हो इससे उस क्षेत्र का पेयजल में शुद्धता कितना है, यह इस पर निर्भर करता है। इसलिए पानी के सेवन में हर मां को शुद्ध पेयजल सेवन का ख्याल रखते हुए बच्चों के दूध पिलाने की प्रक्रिया को जारी रखना है। यह सच है कि यदि इस तरह की स्थिति है तो इसका विस्तृत रूप से इसकी गहन जांच की जरूरत है ताकि आने वाले समय में इ...
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