पीलीभीत, जनवरी 2 -- पीलीभीत। शहर के एक बैंकेट हाल में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन वृंदावन धाम से आए कथा व्यास श्री गौरवानंद जी महाराज ने अपनी अमृतवाणी से भक्त जड़ भरत के चरित्र का वर्णन किया। पंडाल श्री राधे श्री राधे के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कथा व्यास श्री गौरवानंद जी ने कहा कि जड़ भरत की कथा श्रीमद् भागवत महापुराणा के पंचम स्कंध में आती है। यह कथा वैराग्य, आत्मज्ञान और अहंकार नाश की अद्भुत शिक्षा देती है। जड़ भरत का पूर्व जन्म राजा भरत के रूप में हुआ था। वे भगवान ऋषभदेव के पुत्र और महान तपस्वी राजा था। राज्य त्याग कर उन्होंने वन में जाकर तपस्या आरंभ की। परंतु एक दिन उन्हें एक हिरण के बच्चे पर अत्यधिक ममता हो गई। उसी ममता के कारण अंतिम समय में उनका चित्त हिरण पर आसक्त रहा और...