नई दिल्ली, दिसम्बर 27 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 20 वर्ष पहले जबरन सेवानिवृत्त किए गए एक पूर्व सीआईएसएफ अधिकारी का सम्मान बहाल करते हुए विभागीय कार्रवाई को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिला सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों में केवल बदले की भावना झलकती है। साथ ही कहा कि महिला की शिकायत किसी गुप्त उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और विमल कुमार यादव की पीठ ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाया गया आरोप साबित नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मान भी लिया जाए कि जांच अधिकारी ने आरोप सिद्ध कर दिए हैं, तब भी जबरन सेवानिवृत्त जैसी कठोर सजा देना उचित नहीं था। कोर्ट ने कहा कि करीब 25 साल बीत चुके हैं और याचिकाकर्ता अब 72 वर्ष के हो चुके हैं। ऐसे में कम से कम अद...