विधि संवाददाता, जनवरी 30 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों के पैरों में गोली मारने और इसे मुठभेड़ करार देने की यूपी पुलिस की प्रथा को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा आचरण पूरी तरह अस्वीकार्य है क्योंकि दंड देने का अधिकार केवल न्यायालयों के पास है, पुलिस के पास नहीं। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने मिर्जापुर के राजू उर्फ ​​राजकुमार व दो अन्य की जमानत अर्जियों पर सुनवाई करते हुए दिया। तीनों पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गए थे। कोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव से यह बताने को कहा है कि क्या पुलिस अधिकारियों को पुलिस मुठभेड़ का दावा करते हुए आरोपियों के पैरों में गोली मारने या किसी अन्य प्रकार से गोली मारने के लिए कोई मौखिक या लिखित निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस मुठभेड़ की प्रथा, विशेष रूप से आरोपी व्यक्तियों के प...