कन्नौज, फरवरी 14 -- छिबरामऊ, संवाददाता। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी रविवार को मनाया जाएगा। कांवड़ यात्रा भगवान शिव (पुरुष रूप) और माता पार्वती (प्रकृति रूपा) के सहयोग एवं एकता की जीवंत प्रतीक है। मीलों दूर से पैदल चलकर कांवड़िये श्रंगीरामपुर गंगा घाट से पवित्र गंगाजल भरते हैं और महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। ब्रह्मलीन इंजीनियर सुप्रभाष सक्सेना ने इस यात्रा का रोचक वर्णन किया था। युवा कांवड़ यात्रा पर जाना चाहते हैं, लेकिन माता-पिता डर और खर्च का बहाना बनाते हैं। मां कलेवा देने से मना कर देती है। तब युवक व्यथा व्यक्त करता है। "मात कलेऊ न करे, पिता खरच न देय, चलन चलन जियरा कहे, हम कांवर को जाएं कि भोला तेरी बम..."। अंततः युवाओं की हठ के आगे माता-पिता झुक जाते हैं और संतान को परदेश भेजने की अनुमति दे देते हैं। यात्रा स...