प्रयागराज, अक्टूबर 15 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले 16 से 18 साल उम्र की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध आईपीसी के तहत दुष्कर्म नहीं था। इसी के साथ कोर्ट ने 2005 की घटना में विवाह के बाद बने शारीरिक संबंध को अपराध मानकर सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम ने कानपुर के इस्लाम उर्फ पलटू की अपील पर दिया है। अपीलार्थी के खिलाफ पीड़िता के पिता ने वर्ष 2005 में दुष्कर्म, अपहरण सहित कई आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि आरोपी उसकी 16 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया और दुष्कर्म किया। आरोपी का कहना था कि वह व लड़की मुस्लिम हैं और उन्होंने सहमति से निकाह किया था। ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता को नाबालिग और उसकी सहमति को महत्वहीन मानते हुए अप...