नई दिल्ली, नवम्बर 4 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी क्षेत्र की कंपनियों के संचालक इस 'डर' से घिरे रहेंगे कि उनके फैसलों को बाद में नकारात्मक तरीके से देखा जाएगा और उन्हें और उनकी कंपनियों को मुकदमेबाजी में उलझाया जाएगा, तो बड़े हिचकिचाते हुए काम करने की प्रवृत्ति पैदा होती है जो भविष्य के लिए सही नहीं है। ये टिप्पणियां शीर्ष अदालत द्वारा सोमवार को दिए गए एक फैसले में की गईं, जिसमें एंग्लो अमेरिकन मेटलर्जिकल कोल प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में लगभग 650 करोड़ रुपये की मध्यस्थता राशि के प्रवर्तन को बरकरार रखा गया। अदालत ने सरकारी कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड की चुनौती को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी अपने वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला भी स्थापित करने में विफल रही। न...
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