प्रयागराज, नवम्बर 22 -- पिन कोड एक प्रधान डाक घर क्षेत्र में रोजाना आने वाली डाक में से लगभग पांच प्रतिशत डाक सही पते या डाक पर लिखे गए मोबाइल नंबर पर कॉल न लगने के कारण बंट नहीं पाती। गलत, अधूरी या अस्पष्ट पते की जानकारी के कारण डाक कई दिनों तक छंटाई केंद्रों में अटक रहती है। संपर्क न होने पर डाक को वापस लखनऊ भेज दिया जाता है, जहां डाक को खोलकर देखा जाता है। अगर डाक के अंदर सही पता मिलता है तो डाक को उस पते पर भेजा जाता है। पिन कोड एक में रोजाना ढाई-तीन हजार तक डाक पहुंचती है, जिसमें पत्र, स्पीड पोस्ट, पार्सल और सरकारी दस्तावेज शामिल रहते हैं। छंटाई के दौरान कर्मचारियों को बड़ी संख्या में ऐसे लिफाफे और पार्सल मिलते हैं जिनमें मकान संख्या, गली, मोहल्ला या मोबाइल नंबर दर्ज नहीं होते। डाक कर्मियों का कहना है कि कई ऐसे लिफाफे मिलते हैं जिसमे...