संभल, सितम्बर 18 -- हीरालाल की आंखों में अभी भी पानी है। उनकी आवाज़ टूट रही है, और शब्द रुक-रुककर बाहर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह. हम प्रेम नगर स्थित टोशा नदी के किनारे पत्थर चुन रहे थे.। रानी और अनीता भी मेरे साथ थीं। अचानक पानी का तेज बहाव आया। मैंने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, ट्रैक्टर पर चढ़ाया. लेकिन सब कुछ बह गया। मैं खुद किसी तरह किनारे पर पहुंचा लेकिन मेरी बेटियां. नहीं। बुधवार को जब हीरालाल अपनी एक बेटी का शव लेकर व दूसरी बेटी के मिलने की उम्मीद लेकर पहुंचे तो उनका दर्द छलक पड़ा। गांव में उस मंजर का देख हर किसी की आंख नम हो गई। मां सरोज देवी ने कहा कि मैं सुबह अपने पति और बेटियों के लिए खाना बना रही थी। आटा गूंधा, हरी सब्ज़ी काटी. तभी किसी ने दौड़कर बताया कि पानी आया है। मैं झोपड़ी से बाहर भागी, बेटियों के नाम पुकार...
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