दरभंगा, सितम्बर 8 -- मनीगाछी। अपने पितरों को संतुष्ट कर वंश वृद्धि की कामना से किया जाने वाला पितृ तर्पण का शुभारंभ रविवार को अगस्त्य तर्पण के साथ ही हो गया। हिंदू सनातन धर्मावलंबियों का यह महत्वपूर्ण पर्व विशेष रूप से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होकर अमावस्या तिथि तक चलता है। पितृपक्ष के आरंभ होने के पूर्व दिन अर्थात भाद्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ऋषियों में श्रेष्ठ अगस्त्य को जलांजलि देकर इसका शुभारंभ किया जाता है। इस अवधि में धर्म ग्रंथों के अनुसार पार्वण करने का विधान किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष के दिन हमारे मृत पूर्वज मर्त्यलोक में परोक्षरूप से आकर अपनी निचली पीढ़ियों से अन्न जल आदि की अपेक्षा रखते हैं,जिसे लोग पार्वण श्राद्ध के माध्यम से उन्हें मंत्रों के द्वारा पहुंचा कर संतुष्ट करते हुए उन...
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