देवघर, जनवरी 14 -- पालोजोरी प्रतिनिधि। सेंदरा की परंपरा निभाने के साथ आदिवासी समाज का सबसे बड़ा पर्व सोहराय का समापन बुधवार को हो गया। सेंदरा या सकरात माहा के दिन आदिवासी समाज सामूहिक रूप से जंगलों में शिकार करने जाते हैं। यह परंपरा न केवल शिकार का अवसर है बल्कि सामूहिक और सामुदायिक एकता, परस्पर सहयोग और पारंपरिक कौशल का प्रदर्शन भी है। सोहराय पर्व जो सदियों से आदिवासी समुदाय परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। यह झारखंड, ओड़िसा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय में विशेष रूप से मनाया जाता है। पर्व मुख्य रूप से पांच दिन का होता है। फसल कटाई के साथ पशुओं, पूर्वजो व भाई-बहन को धन्यवाद देने और सामूहिक आनंद का प्रतीक है। 5 दिनों तक चलने वाले पर्व का समापन सेदरा या सकरात माहा के साथ बुधवार को समाप्त हो गया। पर्व के आखिरी दिन सकरात माहा या से...