तेहरान, जनवरी 12 -- आज जब ईरान की सड़कों पर रजा पहलवी की वापसी के नारे गूंज रहे हैं और इस्लामी गणतंत्र की नींव हिलती दिख रही है, तो भारत के कूटनीतिक गलियारों में एक पुरानी और अनकही हकीकत पर भी चर्चा हो रही है। इतिहास का यह विरोधाभास चौंकाने वाला है- एक उदारवादी शाह पाकिस्तान का 'सगा' था, जबकि एक कट्टरपंथी अयातुल्ला खामेनेई अनजाने में भारत के 'सुरक्षा कवच' बन गए। 1979 में जब अयातुल्ला खामेनेई की विचारधारा ने तेहरान की सत्ता संभाली, तो दुनिया को लगा कि यह कट्टरपंथ भारत के लिए खतरा होगा। लेकिन पिछले चार दशकों का लेखा-जोखा कुछ और ही कहानी कहता है। ईरान की उस क्रांति ने पाकिस्तान के अंदर एक ऐसी 'वैचारिक आग' लगा दी, जिसने पाकिस्तान को कश्मीर से ज्यादा अपनी ही हिफाजत में उलझा दिया। इसे तीन प्रमुख परतों में समझा जा सकता है:1. पाकिस्तान: प्रॉक्सी ...
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