भागलपुर, नवम्बर 3 -- भागलपुर, मुख्य संवाददाता। राजनीति में कोई स्थायी मित्र नहीं, कोई स्थायी शत्रु नहीं, बल्कि स्थायी हित होते हैं। यह कथन 19वीं सदी के ब्रिटिश राजनेता लॉर्ड पामर्स्टन का है। दुनिया की राजनीतिक गतिविधियों पर उनके यह कथन आज भी प्रासंगिक हैं। खासकर चुनाव के दिनों में। भागलपुर विधानसभा के बहाने कई नेताओं की दूरियां नजदीकियां में बदलीं, तो कई 'अपने' पल भर में बेगाने हो गए। टिकट मिलने या कटने पर आमने-सामने होकर चुनाव मैदान में खड़े आधा दर्जन से अधिक प्रत्याशी पांच साल में ही राजनीतिक दोस्त से दुश्मन बन गए। वहीं कइयों की नफरत प्यार में तब्दील हो गई। चुनावी नजारे गवाही दे रहे हैं कि बीते चुनाव में जिसे धूल चटाया था। अब उसके लिए ही वोट मांग रहे हैं। मतदान की तारीख नजदीक आते-आते चुनावी नजारा तेजी से बदल रहा है। जिससे मतदाता भौंचक र...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.