किशनगंज, नवम्बर 2 -- ठाकुरगंज। एक संवाददाता ठाकुरगंज प्रखंड के धूमगढ़ निवासी 84 वर्षीय मागेश्वर दास ने चुनावों के पुराने जमाने की यादें साझा करते हुए बताया कि पहले चुनाव सादगी और शांति से संपन्न होते थे। वह कहते हैं कि तब चुनाव की घोषणाएं या प्रचार-प्रसार कम होता था। लोग खुद प्रत्याशी का साथ देते थे। उनको नि:स्वार्थ भावना से सहयोग करते थे, पैदल चलकर वोट मांगते थे। चुनाव के दौरान शोर-शराबा भी लगभग न के बराबर होता था। मांगेश्वर दास ने बताया कि पहले ग्रामीण राजनीति में मुखिया एक अहम व्यक्ति होते थे। वे प्रत्याशियों को लेकर गांव में आते और उनका परिचय कराते थे। मुखिया की बात का असर होता था। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद भी मुखिया और प्रतिनिधि अपने गांव वालों को नहीं भूलते थे। वे हर समय ग्रामीणों की समस्याओं को समझने और दूर करने के लिए तत्प...
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