लखनऊ, जुलाई 7 -- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने भी नियामक आयोग में अधिकारियों की बैठक पर आक्रोश जताया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि बीते सात महीने से नियमों को ताक पर रखकर निजीकरण की प्रक्रिया चलाई जा रही है और अब आयोग पर दबाव बनाकर प्रस्ताव पास करने की कोशिश हो रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि पहले सलाहकार की नियुक्ति अवैध हुई, निजीकरण की प्रक्रिया में लगे अधिकारी को तीन बार सेवा विस्तार दिया गया, सेवा नियमावली में गलत बदलाव किए। जब इतने पर भी बात नहीं बनी और मसौदा आयोग ने बैरंग वापस कर दिया तो आयोग को दबाव में लेने की कोशिश हो रही है। भ्रष्टाचार के लिए हो रहे निजीकरण में मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरें...
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