नई दिल्ली, जनवरी 1 -- बिहार विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अपनी रणनीति बदल सकती है। पार्टी इस बार वाम मोर्चा के साथ गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव मैदान में उतर सकती है। क्योंकि, पार्टी को डर है कि पश्चिम बंगाल में गठबंधन से केरल में वाम मोर्चा सरकार के विरोध की धार कमजोर होगी। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वाम मोर्चा ने गठबंधन में पिछले कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़े हैं। वर्ष 2016 में कांग्रेस को 44 और वाम मोर्चा को 26 सीट मिली। पर, 2021 में दोनों पार्टियों को एक भी सीट नहीं मिली। वहीं, 2016 में तीन सीट हासिल करने वाली भाजपा 38 फीसदी वोट के साथ 77 सीट पर पहुंच गई। इस गठबंधन का कांग्रेस को पश्चिम बंगाल के साथ केरल में भी नुकसान उठाना पड़ा। केरल में कांग्रेस की अगुआई वाली यूडीएफ और वाम मोर्चा का एलडीएफ आमने-स...
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