बिजनौर, सितम्बर 1 -- दशलक्षण पर्व के चौथे दिन दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन करते हुए पंडित हिमांशु जैन ने कहा कि सुचिता या पवित्रता का नाम ही शौच धर्म है। जैसे-जैसे मनुष्य का लोभ कम होता है वैसे-वैसे ही उसकी सुचिता अर्थात शौच बढ़ती जाती है। लोभी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लोभी व्यक्ति क्रोध को भी दवा लेता है। मान को भूल जाता है और माया को भी रोक लेता है। इसका उद्देश्य होता है कि बस काम बनना चाहिए। लोभ को पाप का बाप कहा गया है। क्योंकि इसी के वसीभूत होकर लोभी व्यक्ति पाप करता है। वह पाखंड को अपना धर्म मानने लगता है। लोभ करने से पुण्य रहित व्यक्ति को कुछ नहीं मिलता। इस मौके पर रविवार को मंदिर जी में पुष्प दत भगवान का मोक्ष कल्याण मनाया गया। इस मौके पर भगवान को लाडू चढ़ाए। कार्यक्रम को सफल बनाने में अशोक जैन, संजय जैन, शोभित जैन, दीपक जैन, ...
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