संभल, सितम्बर 6 -- श्रीदिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पर्यूषण महापर्व में शुक्रवार को उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ पूजा-अर्चना कर शांतिधारा की। शाम को सामूहिक आरती, प्रवचन व शब्दों की रचना प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश से आए जैन शास्त्री चंद्र कुमार ने कहा कि आकिंचन का वास्तविक अर्थ है किसी भी प्रकार की संपत्ति, पद, मान और अहंकार से रहित होकर आत्मा को शुद्ध करना। जब साधक सब प्रकार के भौतिक बंधनों से मुक्त होकर केवल आत्मा के स्वरूप का चिंतन करता है, तभी वह सच्चे अर्थों में आकिंचन धर्म को धारण करता है। शाम को सामूहिक आरती व शब्दों की रचना प्रतियोगिता का आायोजन हुआ। इसमें स्वाति व सौरभ जैन ने प्रथम, मीतेश जैन ने द्वितीय प्राप्त हुआ। संभव जैन समेत मोहित जैन, राहुल जैन, नवनीत जैन आदि मौजूद...
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