बरेली, फरवरी 23 -- आमतौर पर माना जाता है कि बोर्ड परीक्षाओं के करीब आने पर छात्रों पर उसका तनाव, पढ़ाई का दबाव बढ़ जाता है जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है। लेकिन टेलीमानस के करीब 10 माह के आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि गंभीर चिंताजनक भी हैं। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम टेलीमानस की रिपोर्ट बताती है कि 15-17 वर्ष आयुवर्ग के किशोर-किशोरियों में परीक्षा के दबाव से कहीं बड़ी समस्या उदासी (मूड आफ सैडनेस) है। काउंसलिंग और इलाज के रिकॉर्ड के बाद जारी की गई एक विशेष बुकलेट में यह खुलासा हुआ है। अप्रैल 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच करीब 13 हजार से अधिक किशोर-किशोरियों की टेलीमानस के जरिए काउंसलिंग और इलाज हुआ। इस दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के पीछे केवल अकेली परीक्षा जिम्मेदार नहीं है। उससे कहीं अधिक बड़ी प...
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