लखीमपुरखीरी, अक्टूबर 6 -- लखीमपुर, संवाददाता। धान कटाई शुरू होते ही किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग लगातार किसानों को बता रहा है कि फसल अवशेष भूमि के लिए वरदान हैं। इनको जलाएं नहीं खाद बनाएं। इसके बाद भी किसान पराली जाते हैं। पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। फसल अवशेष जलाने से भूमि के सूक्ष्म जीव नष्ट हो रहे हैं। मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन कम हो रहा है। लगातार जागरूकता कार्यक्रमों के बाद भी किसान खेतों में फसल अवशेष जला देते हैं। फसल अवशेष जलाने के आंकड़े अगर देखे जाएं तो वर्ष 2024 में 80 मामले पराली जलाने के आए थे। जबकि इससे पहले 2023 में 65, जबकि 2022 में 109 और 2021 में 170 वहीं 2020 में 155 मामले पराली जलाने के सामने आए थे। पराली जलाने वाले किसानो...
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