बांदा, नवम्बर 28 -- बांदा, संवाददाता। फसल अवशेष प्रबंधन पराली, पुआल, पैरा, कूड़ा-करकट, अपशिष्ट जलाये जाने से वायु प्रदूषण हो रहा है। उत्पन्न हो रहे धुएं द्वारा वातावरण में पहले से विद्यमान विभिन्न गैसों के साथ कोलाइड बनाने से वायु अत्यन्त ही प्रदूषित व जहरीली हो जाती है। मृदा में उपलब्ध लाभकारी जीवाणुओं की संख्या में कमी आती है। पराली जलने से गैसों यथा कार्बन डाईआक्साइड एवं कार्बनमोनो आक्साइड की मात्रा वातारण में बढ़ जाने से मानव स्वास्थ्य में प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे श्वांस से संबंधित बीमारियां बढ़ती हैं। शासन द्वारा पराली जलने की घटनाओं को रोकने हेतु सख्त कदम उठाये जा रहे है। सेटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जा रही है। उप कृषि निदेशक डा.एकेएस यादव ने कहा कि पराली जलाने की घटनायें घटित होने पर पराली जलाने वाले के विरूद्व दंडात्मक कार...