शामली, जुलाई 24 -- बुधवार को दिगंबर जैन धर्मशाला में मुनि श्री 108 विव्रत सागर मुनिराज ने भावपूर्ण प्रवचन दिया। उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षकों को नमन करते हुए कहा कि उनके ज्ञान से समाज सुगंधित हुआ है। बुधवार को मुनि श्री ने संसारिक सुख की अवधारणा पर प्रश्न उठाया और स्पष्ट किया कि यह सुख वास्तव में पराधीन होता है। पति-पत्नी, व्यापार और शरीर के उदाहरणों से उन्होंने समझाया कि जब तक सुख बाहरी चीजों पर निर्भर है, वह न तो स्थायी है और न ही सच्चा। उन्होंने कहा कि आत्मा की स्वतंत्रता में ही वास्तविक सुख है। प्रवचन में यह भी बताया गया कि संसार में सुख की तलाश करना मूर्खता है, क्योंकि वहां केवल दुख है। सच्चा सुख आत्मा और धर्म में छिपा है, जिसे केवल सही दृष्टिकोण से ही जाना जा सकता है। मुनि श्री ने कहा कि धन का उपयोग पुण्य अर्जन के लिए किया जाए तो वही...