देहरादून, नवम्बर 3 -- देहरादून। दून पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने न्यौली, खेल, झोड़ा, चांचरी, छपेली, चैती समेत अन्य लोकगीतों की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। सोमवार को राज्य की रजत जयंती के अवसर पर दून पुस्तकालय में उत्तराखंड के लोकगीत विषय पर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सबसे पहले पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने उत्तराखंड के लोकगीत पर व्याख्यात्मक विचार साझा किए। पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने गढ़वाली लोक गीत की पारंपरिक विशेषताओं और वर्तमान स्थिति को उजागर करने का प्रयास किया। उन्होनें लोक संगीत के विविध पक्षों के सन्दर्भ में गायन के माध्यम से जानकारी दी। लोक संगीत किसे कहते हैं, गढ़वाल के लोक संगीत के अंतर्गत कौन कौन सी विधाएं प्रचलन में हैं तथा लोकगीतों व संगीत का क्या सामाजिक व सांस्कृतिक म...