भोपाल, अक्टूबर 14 -- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि पत्नी का गुस्सा उसे निराधार आरोप लगाकर अपने पति की छवि खराब करने का अधिकार नहीं देता। इसी के साथ कोर्ट ने पति को तलाक दे दिया। कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें न्यायिक अलगाव तो दिया गया था, लेकिन तलाक नहीं। न्यायमूर्ति विशाल धगत और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने कहा; "यह स्थापित है कि पत्नी पति के अवैध संबंधों के बारे में बहुत गंभीर आरोप लगा रही थी। हालांकि साबित करने में पूरी तरह विफल रही है। हम मानते हैं कि यदि आरोप सत्य थे, तो पत्नी को अपने द्वारा बार-बार किए जा रहे दावों को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए थी, या हम यह कह सकते हैं कि इन गंभीर आरोपों को साबित करने का भार उस पर ही था। अदालत ने कहा कि निचली...
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