नई दिल्ली, फरवरी 18 -- अफगानिस्तान में महिलाओं की दयनीय हालत छिपी नहीं है। 2021 में तालिबान के सत्ता संभालने के बाद से यहां महिलाओं के अधिकारों का लगातार दोहन हुआ है। तालिबानी हुकूमत ने देश में महिलाओं के पढ़ने, लिखने, बाहर जाने, यहां तक कि सार्वजनिक जगहों पर हंसने तक पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच अब अफगानिस्तान में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को भी कानूनी लाइसेंस दे दिया गया है। तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने हाल ही में 90 पन्नों वाली नई दंड संहिता पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कानून महिलाओं के लिए सजा से कम नहीं है। नए नियमों को आधिकारिक रूप से 'दे महाकुमु जजाई उसूलनामा' का नाम दिया गया है। तालिबान सरकार द्वारा पूरे देश में लागू किए जाने वाले इस कानून के तहत सजा की प्रकृति इस आधार पर तय की जाएगी कि पीड़ित व्यक्ति 'आजाद' है या ...