रांची, जनवरी 30 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने दांपत्य अधिकारों की बहाली लेकर दाखिल याचिका पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी को अपनी नौकरी छोड़कर पति के साथ रहने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि नौकरी जारी रखना पति से अलग रहने का एक उचित व वैध कारण हो सकता है। अदालत ने पाकुड़ फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए प्रार्थी जितेंद्र आजाद की याचिका खारिज कर दी। प्रार्थी जितेंद्र आजाद ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा नौ के तहत पत्नी मीना गुप्ता के खिलाफ दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दाखिल की थी। उनका आरोप था कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के उन्हें छोड़कर अलग रह रही है। पत्नी ने अदालत को बताया कि पति और ससुराल ...