नई दिल्ली, नवम्बर 21 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने उस शख्स के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट का मुकदमा हटाने से इनकार किया है जिस पर आरोप है कि उसने 18 साल की कम उम्र की पत्नी के साथ संबंध बनाए। आरोपी की पत्नी ने कहा कि संबंध उसकी सहमति से बनाए गए थे, इसके बावजूद अदालत ने माफी नहीं दी और बताया कि क्यों ऐसा करना उचित नहीं होगा। आरोपी के खिलाफ यह मुकदमा 2023 में दर्ज किया गया था। अदालत ने कहा कि जिस कानून में नाबालिग से सेक्स को अपराध बताया गया है उसमें से अपवाद नहीं निकाला जा सकता है। जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने कहा कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस ऐक्ट (पॉक्सो) के तहत 18 साल से कम के व्यक्ति की सहमति कोई मायने नहीं रखती है। अदालत ने कहा कि संसद की ओर से 18 साल की आयु निर्धारित की गई है जिससे कम होने पर कानून सहमति से संबंध को मान्यता नहीं दे...
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