रांची, जनवरी 10 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति द्वारा पत्नी के मोबाइल से उसकी निजी तस्वीरें बिना अनुमति निकालना और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की धमकी देना, मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। अदालत ने इसे हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक का वैध आधार माना है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने पत्नी की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं होती, बल्कि किसी महिला की निजता भंग करना, उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना और उसे बदनाम करने की धमकी देना भी गंभीर मानसिक क्रूरता है। मामले के अनुसार, दोनों की शादी 13 मार्च 2020 को धनबाद के झरिया में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के ...
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