प्रयागराज, जनवरी 20 -- इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि पत्नी अपनी शिक्षा से संबंधित खर्चों के लिए अंतरिम भरण पोषण के तौर दावा कर सकती है। उसका ऐसा करना प्रथमदृष्टया उचित है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह स्थापित कानून है कि पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद पति अपनी आय और संपत्ति का विवरण प्रस्तुत नहीं करता तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगा सकती है। यह निर्णय न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद ने पत्नी के पक्ष में अंतरिम भरण पोषण के एडिशनल फैमिली कोर्ट पीलीभीत आदेश को बरकरार रखते हुए दिया है। साथ ही इस आदेश के विरुद्ध श्याम मोहन की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। मामले के तथ्यों के अनुसार पत्नी ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की अर्जी दाखिल कर बताया कि उसका विवाह 14 जून 2020 को हुआ था लेकिन 14 मार्च 2022 से पति-प...