नई दिल्ली, जुलाई 2 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। उच्च न्यायालय ने एक वैवाहिक मामले में व्यक्ति को अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ पारिवारिक न्यायालय की ओर से 45 हजार रुपये की मासिक राशि देने के निर्देश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि वित्तीय सहायता में देरी करना पति-पत्नी अथवा बच्चों को उनके सम्मान से वंचित करने के समान है। परिवार कानूनी रूप से ऐसे समर्थन का हकदार है। पीठ ने कहा कि गुभाराभत्ता महज एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति का नैतिक व कानूनी कर्तव्य है, जो उसके परिवार के लिए अति-आवश्यक है। इस मामले में पति की तरफ से गुजाराभत्ता कम करने की याचिका पर पीठ ने बेटी की गुजाराभत्ता रकम घटाकर 17 हजार पांच सौ रुपये प्रतिमाह कर दिया है। जबकि इसकी पत्नी...
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