गोरखपुर, फरवरी 6 -- विवेक पाण्डेय गोरखपुर। मां-बाप चाहते हैं कि उनका बेटा-बेटी पढ़-लिखकर काबिल बने, लेकिन दबाव, डांट, असफलता का डर और भावनात्मक असंतुलन बच्चों और किशोरों को इस कदर तोड़ रहा है कि वे अपनी जान तक देने को मजबूर हो जा रहे हैं। बीते एक साल के आंकड़े स्थिति की गंभीरता बताने के लिए काफी हैं। आंकड़ों के अनुसार, मां-बाप की डांट, पढ़ाई में कम नंबर, मोबाइल गेमिंग की लत और पारिवारिक दबाव के चलते बीते एक साल में गोरखपुर जोन में 14 वर्ष से कम उम्र के 32 बच्चों ने आत्महत्या कर ली। वहीं, 15 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में यह संख्या 123 तक पहुंच गई। बच्चों और किशोरों को मिलाकर बीते एक वर्ष में गोरखपुर जोन में कुल 155 आत्महत्याओं के मामले सामने आए हैं। आर्थिक तंगी नहीं, अब घरेलू कलह बन रही सबसे बड़ी वजह आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक तंगी अब आत्महत्...
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